Purple Potato Farming: पराठे हो या सब्जी, आलू का इस्तेमाल तो लगभग हर घर में होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं बाजार में में आलू की एक ऐसी खास किस्म भी मौजूद है. ये किस्म अपने खास बैंगनी रंग और पोषक तत्वों की वजह से लोगों के बीच चर्चा में है. इसका नाम कुफरी जमुनिया है. इस खास किस्म को भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने तैयार किया है.
यह आलू साधारण आलू के मुकाबले कुछ जरूरी पोषक तत्व ज्यादा देता है. वहीं, किसानों के लिए भी इसकी खेती एक नया विकल्प बन सकती है. आइए जानते हैं इस बैंगनी आलू की खासियत और इसकी पैदावार के बारे में.
2024 में जारी हुई थी कुफरी जमुनिया किस्म
कुफरी जमुनिया आलू की एक खास किस्म है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने विकसित किया है. इसे साल 2024 में जारी किया गया था. इस आलू की सबसे बड़ी पहचान इसका बैंगनी रंग है. इसका रंग किसी केमिकल की वजह से नहीं, बल्कि इसमें मौजूद एंथोसायनिन नाम के प्राकृतिक तत्व से आता है.
साधारण आलू से ज्यादा पोषक तत्व
कुफरी जमुनिया में विटामिन सी, आयरन और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 100 ग्राम कुफरी जमुनिया में करीब 42.75 मिलीग्राम विटामिन सी होता है, जबकि साधारण आलू में इसकी मात्रा लगभग 23.15 मिलीग्राम है. इसी तरह इसमें 3.22 मिलीग्राम आयरन और 2.28 मिलीग्राम जिंक भी पाया जाता है. इसमें मौजूद एंथोसायनिन शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि इसे पोषण के लिहाज से खास माना जा रहा है.
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एक हेक्टेयर में मिल सकती है 35 टन तक पैदावार
किसानों के लिए इस किस्म की एक और खास बात इसकी अच्छी पैदावार है. इसे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में खेती के लिए सुझाया गया है. परीक्षण के दौरान 90 दिनों में इससे करीब 49 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिला था. हालांकि, सामान्य खेती में इसकी औसत पैदावार करीब 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है. परीक्षण में करीब 90 फीसदी आलू बाजार में बेचने लायक पाए गए थे.
लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं आलू
कुफरी जमुनिया की भंडारण क्षमता भी अच्छी बताई गई है. सही तापमान और देखभाल मिलने पर किसान इसकी फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं. इससे उन्हें कटाई के तुरंत बाद आलू बेचने की मजबूरी कम हो सकती है और बाजार के हिसाब से बिक्री का मौका मिल सकता है.
बीज मिलने में आ सकती है परेशानी
नई किस्म होने के कारण कुफरी जमुनिया के बीज फिलहाल हर जगह आसानी से नहीं मिल सकते. इसलिए किसान इसकी खेती शुरू करने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान से बीज की उपलब्धता और अपने इलाके के लिए इसकी उपयुक्तता की जानकारी जरूर लें. इससे बुवाई के समय होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है.
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