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‘शक है कि वो देश के बारे में सोचते होंगे’, नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर अन्नू कपूर का सवाल – annu kapoor slams naseeruddin shah over mai dimaagi naxal hoon row tmovj


देशभर में इस समय जगह-जगह प्रोटेस्ट देखे जा रहे हैं. हाल ही में दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हुए, जहां बॉलीवुड के वेटरन एक्टर नसीरुद्दीन शाह पहुंचे थे. उन्होंने छात्रों का समर्थन करते हुए सरकार पर निशाना साधा था, और खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहा. उनके इस बयान पर भयंकर बवाल खड़ा हुआ, और हर तरफ से उनकी आलोचना हुई. 

नसीरुद्दीन शाह पर अन्नू कपूर की क्या है राय?

नसीरुद्दीन शाह की आलोचना इंडस्ट्री के कई जाने-माने कलाकारों ने भी की. अब अन्नू कपूर भी इसमें जुड़ गए हैं. एक्टर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने न्यूज एजेंसी से कहा- वो अच्छे डायलॉग बोलने में माहिर हो सकते हैं, लेकिन मुझे शक है कि वो सच में देश के हित और कल्याण के बारे में कितना सोचते हैं. इस तरह के बयान देने वाले लोगों को लेकर मेरे मन में कई सवाल हैं. हमारा लोकतंत्र ही है, जिसकी वजह से ऐसे लोग खुलकर अपनी बात रख पाते हैं, इस तरह के बयान दे पाते हैं और प्रदर्शन कर पाते हैं.

क्या है नसीरुद्दीन शाह का पूरा मामला?

दरअसल, नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया था. इस वीडियो में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ लिखा हुआ बैज पहना था. वो दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों का समर्थन कर रहे थे. ये छात्र यूनिवर्सिटी में छात्र संघ को दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

इस वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने कहा था- मैं गर्व से कहता हूं कि मैं दिमागी नक्सल हूं. मुझे नहीं पता कि चौकीदारों ने मेरे जैसे लोगों को और कौन-कौन से नाम दिए हैं. कभी देशद्रोही कहते हैं, कभी टुकड़े-टुकड़े गैंग और ना जाने क्या-क्या. नसीरुद्दीन शाह पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया के जरिए छात्र प्रदर्शनों का समर्थन करते रहे हैं. पिछले हफ्ते उन्होंने कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) के छात्रों के प्रदर्शन का भी समर्थन किया था.

वहीं, अन्नू कपूर पहले भी विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार पर अपनी बात रख चुके हैं. उनका मानना है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना हर किसी का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा करना और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सही नहीं है.

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