हल्दी की खेती के लिए कैसी मिट्टी होनी चाहिए: हल्दी की अच्छी पैदावार के लिए भुरभुरी, उपजाऊ और पानी को आसानी से बाहर निकालने वाली मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. इसके लिए बलुई दोमट और दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है. खेत में पानी जमा होने से कंद सड़ने का खतरा रहता है.
गर्म और नमी वाला मौसम है फायदेमंद: हल्दी गर्म और नमी वाले मौसम में अच्छी बढ़ती है. इसके पौधों को शुरुआत में पर्याप्त नमी चाहिए. बहुत ज्यादा ठंड और पाले से फसल को नुकसान हो सकता है. इसलिए इसकी खेती का समय अपने इलाके के मौसम के हिसाब से चुनना चाहिए.
बीज नहीं, कंद से होती है बुवाई: हल्दी की खेती बीज से नहीं, बल्कि इसके कंदों से की जाती है. बुवाई के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त बीज कंद चुनें. कंदों में आंखें या कलियां होनी चाहिए, ताकि उनसे नए पौधे निकल सकें.
खेत तैयार करते समय रखें ध्यान: बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें. खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था रखें, ताकि बारिश का पानी जमा न हो.
बुवाई का सही समय और दूरी: आमतौर पर हल्दी की बुवाई मॉनसून की शुरुआत में, यानी मई से जुलाई के बीच की जाती है. हालांकि, सही समय इलाके और सिंचाई की सुविधा पर निर्भर करता है. कंदों को कतारों में उचित दूरी पर लगाएं, ताकि पौधों को बढ़ने की जगह मिले और खेत में निराई-गुड़ाई आसानी से हो सके.
फसल को तैयार होने में कितना समय लगता है: हल्दी की फसल आमतौर पर 7 से 9 महीने में तैयार हो जाती है. जब पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें, तब खुदाई की जा सकती है. कंद निकालने के बाद उन्हें साफ करके उबालने, सुखाने और पॉलिश करने की प्रक्रिया की जाती है. इसके बाद हल्दी बाजार में बेचने के लिए तैयार होती है.
Published at : 01 Nov 2026 12:30 PM (IST)
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