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Cattle Care: गाय-भैंस के प्रसव से पहले करें ये 5 काम, जच्चा-बच्चा दोनों रहेंगे सुरक्षित


Cattle Care Tips: पशुपालन करने वाले किसानों के लिए पशु के गर्भावस्था का आखिरी महीना काफी अहम होता है. इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही पशु और उसके होने वाले बच्चे, दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. इसलिए इस समय पशु के खान-पान से लेकर उसके रहने की जगह और देखभाल तक का खास ध्यान रखना चाहिए. सही देखभाल से प्रसव के समय होने वाली कई दिक्कतों से बचा जा सकता है.

गर्भावस्था के आखिरी महीने में पशु के खाने में थोड़ा बदलाव करना जरूरी होता है. इस दौरान भूसे की मात्रा कुछ कम करके दाने की मात्रा बढ़ाई जा सकती है. पशु को रोजाना करीब 1 से 1.5 किलो अतिरिक्त दाना देने की सलाह दी जाती है. दाना अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए और उसमें कम से कम 20 प्रतिशत प्रोटीन होना जरूरी है. इससे पशु को जरूरी पोषण मिलता है. इसके साथ ही उसे दिनभर साफ और ताजा पानी पीने के लिए उपलब्ध कराएं. 

समतल और साफ जगह पर रखें पशु

  • बच्चा देने का समय नजदीक आने पर पशु के रहने की जगह का भी खास ध्यान रखना चाहिए. 
  • उसे ऊबड़-खाबड़ या ऊंची-नीची जमीन पर नहीं बांधना चाहिए. 
  • ऐसी जगह पर रहने से प्रसव के दौरान बच्चा फंसने जैसी परेशानी हो सकती है. 
  • इसलिए पशु के लिए साफ, समतल और सुरक्षित जगह तैयार करें. 
  • फर्श पर फिसलन नहीं होनी चाहिए और वहां पर्याप्त जगह होनी चाहिए.

बिना सलाह के कैल्शियम न दें

गर्भावस्था के आखिरी महीने में पशु को अपनी मर्जी से कैल्शियम की गोली या पाउडर देना ठीक नहीं है. कई लोग सोचते हैं कि कैल्शियम देने से पशु को ताकत मिलेगी, लेकिन जरूरत से ज्यादा कैल्शियम देने पर मिल्क फीवर जैसी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए किसी भी तरह का सप्लीमेंट देने से पहले पशु चिकित्सक से सलाह जरूर लें.
Cattle Care: गाय-भैंस के प्रसव से पहले करें ये 5 काम, जच्चा-बच्चा दोनों रहेंगे सुरक्षित

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प्रसव से पहले नवसादर देने की सलाह

पशु के बच्चा देने में करीब 10 दिन बाकी रहने पर 30 से 40 ग्राम नवसादर भूनकर दाने में मिलाकर देने की सलाह भी दी जाती है. हालांकि, इसे हर पशु को एक जैसी मात्रा में देना जरूरी नहीं है. पशु की उम्र, सेहत और हालत के हिसाब से इसकी जरूरत अलग हो सकती है. इसलिए इसे देने से पहले पशु चिकित्सक से सही मात्रा जरूर पूछ लें.

दूसरे पशुओं से अलग रखें

प्रसव के आखिरी दिनों में गर्भवती पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखना बेहतर रहता है. कई बार पशु आपस में लड़ने लगते हैं या एक-दूसरे को धक्का मार देते हैं. इससे गर्भवती पशु को चोट लग सकती है और गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसे में उसे शांत और सुरक्षित जगह पर रखें. साथ ही रोजाना उसके खाने-पीने और व्यवहार पर नजर रखें. अगर पशु में कोई असामान्य बदलाव दिखे या प्रसव के दौरान परेशानी हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक की मदद लें.

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