खेत में पानी जमा न होने दें: लगातार बारिश के बाद खेत में ज्यादा पानी जमा रहने से बैंगन के पौधों की जड़ों पर बुरा असर पड़ता है. इससे पौधों को मिट्टी से पोषक तत्व लेने में परेशानी होती है और उनका विकास रुक सकता है. इसलिए किसान खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था रखें और पौधों के आसपास जरूरत के मुताबिक नमी बनाए रखें.
फलन कम होने पर संतुलित खाद दें: बारिश के कारण बैंगन के पौधों का विकास और फलन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में फसल की जरूरत और मिट्टी की स्थिति के हिसाब से खाद देना जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रति कट्ठा एक किलो यूरिया, दो किलो एसएसपी और एक किलो पोटाश का इस्तेमाल किया जा सकता है.
पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए करें छिड़काव: बारिश के बाद पौधों में जिंक और बोरॉन जैसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. इसे दूर करने के लिए 15 ग्राम ग्लूकोज, 2 ग्राम चिलेटेड जिंक और 2 ग्राम बोरॉन को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है. इसका इस्तेमाल फसल की जरूरत और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें.
फल और तना छेदक कीट से रहें सावधान: लगातार नमी रहने पर बैंगन की फसल में फल एवं तना छेदक कीट का खतरा बढ़ सकता है. यह कीट पौधों के तने और फलों में छेद करके उन्हें अंदर से नुकसान पहुंचाता है. इससे फल खराब हो जाते हैं और बाजार में उनकी कीमत भी कम मिल सकती है. इसलिए किसान पत्तियों, तनों और फलों की नियमित जांच करते रहें.
कीट दिखने पर सही दवा का करें इस्तेमाल: फसल में कीट का प्रकोप दिखाई देने पर बिना पहचान किए दवा का छिड़काव न करें. फल एवं तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए स्पिनोसैड 45 एससी, इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी, क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी या फिप्रोनिल जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. दवा की मात्रा और छिड़काव का तरीका पैकेट पर दिए निर्देशों के अनुसार ही रखें.
बारिश के बाद रोज करें फसल की निगरानी: बारिश रुकने के बाद भी बैंगन की फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है. इसलिए किसान समय-समय पर खेत में जाकर पौधों की पत्तियों, तनों और फलों को ध्यान से देखें. सूखते पौधों, खराब फलों और कीटों के लक्षणों को नजरअंदाज न करें. बिना जरूरत कीटनाशक डालने से बचें और खाद या दवा का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें.
Published at : 05 Nov 2026 05:57 PM (IST)
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