सर्दियों से पहले पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने निगरानी तेज कर दी है. 14 अक्टूबर 2026 को हुई समीक्षा बैठक में राज्यों से कहा गया कि दोपहर 3 बजे के बाद खेतों पर खास नजर रखें, क्योंकि कुछ किसान इस समय पराली जलाते हैं ताकि सैटेलाइट की नजर से बच सकें. साथ ही किसानों को पराली का सही प्रबंधन करने के लिए मशीनें उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है.
दोपहर 3 बजे के बाद खेतों पर रहेगी नजर
केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए दोपहर 3 बजे के बाद खेतों की निगरानी बढ़ाई जाए. कुछ जगहों पर किसान देर से खेतों में आग लगाते हैं, जिससे सैटेलाइट से उनकी पहचान करना मुश्किल हो. ऐसे में अधिकारियों को खेतों में जाकर स्थिति देखने और आग लगने की सूचना मिलते ही कार्रवाई करने की भी बात सामने आई है .
पराली जली तो अधिकारियों की भी होगी जवाबदेही
पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सिर्फ किसानों पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है. केंद्र ने राज्यों से कहा है कि खेतों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारी लगातार निगरानी करें. पंजाब और हरियाणा में 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक 34 जिलों में विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं. ये दल मौके की जानकारी जुटाकर संबंधित अधिकारियों के साथ कार्रवाई में मदद करेंगे.
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ड्रोन और दूसरी तकनीकों से होगी निगरानी
पराली जलाने की पहचान के लिए सैटेलाइट के साथ ड्रोन और जमीन पर जाकर जांच करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल भी की जाएगा. ड्रोन की मदद से खेतों में लगी आग, धुएं और प्रभावित इलाके की जानकारी जुटाई जाएगी. हरियाणा सरकार ने जिला और ब्लॉक स्तर पर पराली की निगरानी के लिए विशेष टीम बनाने, देर शाम के समय कड़ी निगरानी बढ़ाने और ड्रोन से निगरानी करने की योजना भी बनाई है. इससे आग लगने की सूचना मिलने पर समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिल सके.
किसानों को मशीनें और आर्थिक मदद भी मिलेगी
सरकार पराली जलाने से रोकने के साथ किसानों को इसके विकल्प देने पर भी जोर दे रही है. मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने और पराली को इकट्ठा करके सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है. किसानों के लिए जरूरी है कि वे स्थानीय कृषि विभाग से मशीनों, सब्सिडी और पराली प्रबंधन के उपलब्ध विकल्पों की जानकारी लें.
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